इस ब्लॉग पर पोस्ट की गयी तस्वीरों (Photographs) पर क्लिक कर के आप उन्हें और स्पष्ट देख सकते हैं।

Tuesday, 20 March 2012

तुकबंदी

बढ़ा किराया महंगी रेल ,
खर्चों पर है नहीं नकेल ,
सरकार पास और जनता फेल,
टूटी कमर निकला तेल। 

Friday, 16 March 2012

आज का फेसबुक स्टेटस ......

मैं सोच रहा था आज वित्त मंत्री महोदय से शराब और सिगरेट के दाम बे इंतिहा बढ़ाने की रिक्वेस्ट करूँ इतने ज़्यादा कि इन चीजों के दाम सुनकर ही लोगों के उड़ जाएँ पर अफसोस इससे पहले कि मैं रिक्वेस्ट करता सचिन बाबू ने महाशतक जड़ दिया और शायद वित्त मंत्री जी अब शतक सेलिब्रेशन मे बिज़ी हो गए होंगे। अब उनके पास तो क्या किसी के भी पास मेरी बकवास सुनने की फुरसत नहीं होगी। :((

बट एनी वे कोंग्रेट्स तो मिस्टर तेंदुलकर !सुना है अब कोई उन से सन्यास लेने को कहने की हिम्मत भी नहीं करेगा :))

Wednesday, 14 March 2012

6 साल का बच्चा शायद इतना ही लिख सकता है ---

मुझे अभी तक यही याद था कि मैंने अपनी पहली कविता 8 वर्ष की उम्र मे लिखी थी लेकिन आज जब पापा ने 28 अप्रेल 1990 का आगरा  से प्रकाशित 'सप्तदिवा'  (साप्ताहिक) अपनी किसी फाइल मे से ढूंढ कर निकाला तो उस तारीख के हिसाब से मेरी उम्र 6 वर्ष की रही होगी (जन्म तिथि 22 नवंबर 1983)। हालांकि संपादक महोदय ने अपनी टिप्पणी मे  एक 7 वर्षीय बालक लिखा है। आज जब खुद की यह कविता पढ़ी तो बहुत हंसी आयी --

बड़ा देखने के लिए इमेज पर क्लिक करें 

ऊपर वाली इमेज मे से ही काट कर यह बनी है बड़ा देखने के लिए इमेज पर क्लिक करें 

Tuesday, 13 March 2012

बीता हुआ कल हूँ (Audio Vesion)

जो मेरा मन कहे पर प्रकाशित कविता "बीता हुआ कल हूँ " पर एक टिप्पणी इन्दु सिंह जी ने की थी--

sunder-sunder abhiyakti....
aapki aawaz me bhi sunna chahenge..............."

उनकी इस टिप्पणी का सम्मान करते हुए मैंने यह कविता आज रिकॉर्ड कर दी है --



 डाउन्लोड लिंक यह है--http://www.divshare.com/download/17022226-ebd

(संभव है कि आपके सिस्टम पर यह ऑडियो रुक रुक कर चले यह आपके इन्टरनेट कनेकशन की स्पीड पर निर्भर होगा)

मेरे पास बहुत ही सस्ता वाला हेडफोन है जो सिस्टम के साथ मुफ्त मे मिला था इसलिए मेरी रिकोर्ड़िंग्स की  वोयस क्वालिटी खराब ही रहती है  :( फिर भी एक कोशिश की है। 

Monday, 12 March 2012

अपनेपन को क्या शब्द दूँ ?

होली के 15 दिन पहले से तबीयत खराब होने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह रुक रुक कर अभी जारी है। हांलांकी पहले से काफी सुधार है फिर भी औरों की तरह सूती कपड़े पहन कर मैं गर्मी नहीं मना पा रहा हूँ। :( बिना बाहों का एक स्वेटर और ऊपर से जेकेट ,पैरों मे मोजे ....मुझे गर्मी का एहसास तक नहीं हो रहा है।
वैसे इस तबीयत के खराब होने कई कारण हैं शरीर का पतला पापड़ होना (सींकिया कहना ज़्यादा सही होगा शायद ),रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना,जन्म से ही लिवर प्रोब्लम्स का होना ,छोटी छोटी बातों से तनाव मे आ जाना वगैरह वगैरह खैर कुछ दवाएं तो हमेशा चलते रहनी हैं और कुछ दवाएं कुछ समय बाद बंद हो जानी हैं ।
इधर इस दौरान विभा आंटी , डॉ सुनीता जी ,एवं  अंजू मैम मुझे लगातार मेरे साथ होने का एहसास दिलाती रहीं ,हर दिन उनका एक मेसेज ज़रूर मिल रहा है तबीयत कैसी है ,इस अपनेपन को कोई नाम नहीं दिया जा सकता। ब्लॉग और फेसबुक पर और  भी कई  मित्र मेरे हालचाल लेते रहे हैं  मैं बस यही सोच रहा हूँ कि किस तरह से सबको धन्यवाद कहूँ ? और इस अपनेपन को क्या शब्द  दूँ ?

हाँ एक बात और आज मैंने एक नशेड़ी की तरह इण्स्ट्रूमेंटल सोंग्स सुने हैं और अपने एक और ब्लॉग (http://yashwantrajbalimathur.blogspot.in/) पर वो गाने डाले भी हैं ।आप भी सुनना  चाहें तो देखिएगा ।  फेसबुक मित्र मेरी वॉल को देख लें :)

Thursday, 1 March 2012

निम्नस्तरीय ब्लॉगर

"अरे ये तुमने क्या लिखा है...बहुत ही साधारण और निम्न स्तर का ...ऐसा तो कोई भी लिख सकता है .....तुमने कौन सा तीर मार लिया ?....खामख्वाह के ब्लॉगर बने फिरते हो" ...
 एक दिन सपने मे मुझ से किसी ने कहा ...मगर मेरी भ्रष्ट बुद्धि ने यह सोच कर लिखना जारी रखने का फैसला किया कि मैं कुछ नहीं से कुछ तो हूँ ...कुछ न लिखने से बेहतर मुझे ऐसा ही निम्न स्तर का लिखना (जैसा मैं लिखता हूँ) अच्छा लगता है ।