इस ब्लॉग पर पोस्ट की गयी तस्वीरों (Photographs) पर क्लिक कर के आप उन्हें और स्पष्ट देख सकते हैं।

Thursday, 21 November 2013

बेहतरीन यू ट्यूब डाउनलोडर .....

यू ट्यूब से वीडियो डाऊनलोड करने के लिये फ़ायरफ़ॉक्स और क्रोम ब्राउज़र के लिए easy youtube downloader एक बेहतर एड ऑन है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दिये गए चित्र की तरह से यू ट्यूब पर एक डाउनलोड लिंक क्रिएट कर देता है जिसकी सहायता से आप mp 3 फॉर्मेट मे भी गाने/ वीडियो  डाउनलोड कर सकते हैं-


डाउनलोड लिंक(firefox)

download for chrome browser

आधिकारिक वेब साइट का लिंक यह है।

Tuesday, 12 November 2013

आखिर क्या है Team Viewer

कितना अच्छा हो अगर हमारे कंप्यूटर पर कोई समस्या हो और दूर बैठा कोई उसे चुटकियों मे ही हल कर दे। जी हाँ इसी समस्या का बेहतरीन समाधान है team viewer नाम का एक सॉफ्टवेयर। 

वैसे तो इस तरह के कई सॉफ्टवेयर उपलब्ध है लेकिन NON COMMERCIAL उद्देश्य के लिए यह बिलकुल मुफ्त है। इस सॉफ्टवेयर की सहायता से वेब बेस्ड सपोर्ट प्राप्त करने और देने के लिये दोनों ही (जो सपोर्ट देगा और जो सपोर्ट लेगा) कम्प्यूटर्स पर इस सॉफ्टवेयर का इन्स्टाल होना ज़रूरी है। 

इस सॉफ्टवेयर को इन्स्टाल करने के बाद आप जहां सीधे अपने डेस्कटॉप को किसी से भी एकसेस  करवा सकते हैं वहीं अगर आप चाहें तो किसी को सहायता भी दे सकते हैं।

सॉफ्टवेयर को कैसे इस्तेमाल करें-

सब से पहले तो इसे इस लिंक से डाउनलोड कर लीजिये (साइज़ मात्र 6 MB)

सेटअप इन्स्टाल हो जाने के बाद जब आप इस सॉफ्टवेयर को रन कराएंगे तो इस तरह की स्क्रीन दिखेगी-



जैसा कि आप देख रहे हैं इसमे 3 बातें मुख्य हैं। 

1--Your ID--(यह आपकी सॉफ्टवेयर आई डी है,मदद लेते समय आपको यह आई डी मदद देने वाले को बतानी होगी। )

2--Password--(यह 4 अंकों की संख्या है जो मदद लेते समय आपको यह आई डी मदद देने वाले को बतानी होगी।) लेकिन खास बात यह है कि जितनी बार आप इस सॉफ्टवेयर को अपने कंप्यूटर पर open करेंगे उतनी बार यह पासवर्ड अपने आप ही बदल जाएगा। अतः आपको इस बात से निश्चिंत रहना चाहिए कि एक सेशन के बाद वह व्यक्ति जिस को आपने यह ID और Password मदद प्राप्त करने के लिए बताया है आपका कंप्यूटर किसी भी तरह एक्सेस नहीं कर पाएगा। 
आप चाहें तो अपना एक यूनीक पासवर्ड भी सेट कर सकते हैं और उसे हर सेशन के बाद बादल भी सकते हैं। 

3--Control Remote Computer---यह हिस्सा मदद देने के लिए हैं। इसके नीचे दिये गए बॉक्स मे जिस कंप्यूटर को मदद देनी है उसकी ID डालनी होगी और उसके बाद Connect to partner पर क्लिक करते ही Password के लिए एक विंडो  prompt होगी।  जिसे डालते ही आप अपनी मदद देने के लिए दूसरे कंप्यूटर से जुड़ सकते हैं। 

इस सॉफ्टवेयर के बारे मे और अधिक जानकारी  Team Viewer की अधिकृत वेबसाइट से यहाँ क्लिक कर के ली जा सकती है। 

Wednesday, 6 November 2013

2 साल भी हो गए

अभी एक दिन भावना जी ने पूछा कि आखिर मेरे हैं कितने ब्लॉग ,और दूसरे अधिकतर ब्लोगस के कमेंट्स में मेरा कमेन्ट ज़रूर दिखाई देता है :) मेरे अपने कूल 5 ब्लोगस हैं जिनमे से 4 ब्लॉग पर मैं फिलहाल सक्रिय हूँ। नयी पुरानी हलचल,जो मेरा मन कहे,बातें खुद से और music and songs।  इनमे भी इस ब्लॉग यानि बातें खुद से और music and songs पर कभी कभी ही ज़्यादा सक्रिय होता हूँ।

वक़्त बहुत तेज़ी से बढ़ता है...इतना तेजी से कि कुछ पूछिए मत। अब देखिये न  4 नवंबर 2011 को यह ब्लॉग शुरू किया था और देखते देखते 2 साल हो भी गए। खुद से बातें करने का अलग ही मज़ा होता है। बात कहने वाला भी मैं,सुनने वाला भी मैं और अगर हुई तो उस पर अपनी प्रतिक्रिया देने वाला भी मैं :) लेकिन कमेन्ट बॉक्स खुला है तो आप लोगों के भी विचार पता चल जाते हैं;अच्छा लगता है।

खैर कभी कभी मन होता है छोटा सा ब्रेक ले ले लूँ पर मैं इतना बड़ा चिपकू हूँ कि आसानी से पीछा कैसे छोड़ दूँ :) :) आप ही बताइये :)

खैर बहुत हो गयी बक बक...अब चलता है हम।

बाय !

Sunday, 3 November 2013

मैं पटाखे नहीं छुड़ाता......

आगरा में रविवार के साप्ताहिक सत्संग के अतिरिक्त आर्यसमाज के प्रवचनों मे पापा के साथ अक्सर जाना होता था खास तौर से होली- दीवाली पर। आर्य समाज कमलानगर मे तब एक सन्यासी जी भी अक्सर अपनी बात रखने आया करते थे स्वामी स्वरूपानन्द जी। बात -व्यवहार से एकदम स्पष्टवादी। किसी को उनका कहा बुरा लगे तो उनकी बला से और गलत बात पर किसी को भरी सभा मे फटकारने से भी उन्हें गुरेज नहीं था। । बचपन से हर दिवाली पर थोड़े बहुत पटाखे चलाने के शौक था। आस-पड़ोस के लोगों को ढेर से पटाखे चलाते देख मेरा भी मन मचलता था। पापा भी दिलवा ही दिया करते थे। पापा ने कभी मना नहीं किया बस इतना ज़रूर था कि पापा ने हमेशा यह ज़रूर कहा कि फालतू चीजों पर खर्च करने से अच्छा उन पैसों से मिठाई या कोई और फल आदि लेना/खा लेना ज़्यादा अच्छा है।

शायद वर्ष  1997-98   की बात है ,तब मैं 9th क्लास में पढ़ता था। उस साल भी दीवाली पर फुलझड़ी आदि लिया हुआ था। लेकिन ऐन दीवाली के दिन स्वामी जी के प्रवचन का ऐसा असर हुआ कि उस दिन से पटाखों से विरक्ति हो गयी। जो थोड़ा बहुत याद है उस अनुसार स्वामी जी ने उक्त प्रवचन मे पटाखों को हिंसात्मक प्रवृत्ति का प्रतीक बताया था जबकि हमारे देश की मूल भावना मे अहिंसा का तत्व अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जैसे तैसे बेमन से उस साल तो फुलझड़ी छुड़ा ही ली थी (क्योंकि बिका हुआ माल दुकानदार वापिस नहीं लेते) पर उसके बाद से आज तक मैंने दीवाली पर कोई पटाखा या फुलझड़ी नहीं खरीदा। पापा आज भी अक्सर कहते हैं कि जिस काम के चीज़ के लिए उन्होने कभी मुझ से मना नहीं किया उस चीज़ की इच्छा मेरे मन से सिर्फ एक प्रवचन को ध्यान से सुन लेने मात्र से ही मिट गयी।

पापा ने इस लिंक पर इस बारे मे खुद भी कुछ लिखा था।

बहुत सी बातें अब भी हैं जिनका मन से मिटना ज़रूरी है।  देखते हैं शायद फिर कहीं कोई ऐसी बात सुनने को मिल ही जाए जिससे बाकी फिजूल की बातों को अस्तित्व भी समाप्त हो सके।

आप सभी को दीप पर्व सपरिवार शुभ और मंगलमय हो। 

Friday, 1 November 2013

GOD बेमेल है.....मैंने गलत तो नहीं कहा न

फिरदौस जी के इस फेसबुक स्टेटस और उस पर अपनी टिप्पणी को सहेजने के लिहाज से इस ब्लॉग पर पोस्ट कर दे रहा हूँ।

काफी लोगों ने अपनी बात काही,मैंने भी कही।
मैं यह नहीं कहता कि जो मैंने कहा वही ठीक है लेकिन जो मैंने कहा वह मुझे लगा कि ठीक ही है।

तो फिलहाल आज की पोस्ट चिप्पियों के नाम :)


जो लोग इस ब्लॉग को पढ़ रहे हैं या देखते ही रहते हैं उन सबको यानि आप सब को धनतेरस की सपरिवार अशेष शुभकामनाएँ!